Sahar Ne Ek Shayar Sanwara Tha | शहर ने एक शायर संवारा था

आज फिर उस शहर आ गया हूँ 
जिस शहर ने एक शायर संवारा था 

गुस्ताख़ी हुई थी जहाँ इस दिल से 
पहले दीदार में जो बना बे-सहारा था 

मुहब्बत हुई भी तो उन नज़रों से 
जिनके लिए मेरा चेहरा नागवारा था 

लुटे भी हम उस आवाज़ के पीछे 
जिन्होंने हमे सुनते नकारा था 

दीवानगी हुई भी उस चेहरे से
जिनके पीछे मैं बना आवारा था 

पीटना ही रह गया था बाकि 
वक़्त रहते कलम बन चूका सहारा था 

आज फिर उस शहर आ गया हूँ 
जिस शहर ने एक शायर संवारा था 

                    --- आदित्य देव राय
                    --- Aditya Deb Roy

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