अपने लफ़्ज़ों से हक़ीक़त को दिखाना है आसान नही आईना समझ नदी किनारे खड़े हो जाना है आसान नही ना साफ़-साफ़ लफ़्ज़ों ने ना साफ़-साफ़ दरिया ने दिखाया है धुंदला पढ़कर भी छुपी हक़ीक़त समझ जाना है आसान नहीं उकेरते तो लाखों हैं आजकल दिल के टूट जाने पर बिलखती औरतों का दर्द लिख जाना है आसान नही मीरा, जॉन, शिव, मजाज़ तो सब बनना चाहते हैं आजकल पर ज़माने की सुनकर सूध खोकर लिखना है आसान नही अपनी तक़दीर का रुख़ बदलने को कलम सबने पकड़ रखा है पर "आदित्य " कातिब-ए-तक़दीर का मन बदलना है आसान नही --- आदित्य देव राय --- Aditya Deb Roy कातिब-ए-तक़दीर - भाग्य लेखक (Writer of destiny)
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